बीकानेर अपडेट। पीबीएम अस्पताल में नॉन प्रैक्टिस अलाउंस को लेकर शुरू हुई पड़ताल लगातार नए नाम सामने ला रही है। पहले डॉ. मानमहेंद्र सिंह जट्टू, फिर डॉ. गीता सोलंकी और उसके बाद डॉ. विक्रांत शेखावत का मामला सामने आया था। अब इस कड़ी में चौथा नाम अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय लोढ़ा का सामने आया है।
प्राप्त जानकारी और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह सवाल उठ रहा है कि यदि संबंधित डॉक्टर NPA का लाभ ले रहे हैं, तो क्या नियमों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है? NPA उन सरकारी डॉक्टरों को दिया जाता है जो निजी प्रैक्टिस नहीं करते। ऐसे में यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो यह गंभीर जांच का विषय है।
यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो यह केवल एक डॉक्टर का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का सवाल होगा।




